Let me fly.
उड़ने दो मुझे
पंखों को समेट बहुत दिन रह लिया,पिंजरे में इंतज़ार बहुत कर लिया.खुशिया न मिल सकीं मुझे इस रूप में,दूसरों का एहसान बहुत सह लिया
वक़्त के साथ सिमट गया हूँ मैं,काल के साथ ठहर गया हूँ मैंदेख लेने दो अब मुझे इस जहाँ को,नजरें झुका कर बहुत रह लिया हूँ मैं
विचारों के साथ खुलकर जीने की चाह है,अपनों के साथ भी मेरी उड़ने की चाह हैमानता हूँ कि अभी अनजान हूँ इस दुनिया से,पर इस दिल में, पहचान बनाने की चाह है.
बनना चाहता हूँ एक सूरज मैं, मुझे बनने दो,कहना चाहता हूँ मन की बातें, मुझे कहने दोनहीं रहना चाहता हूँ अब सिमटा मैं,स्थिर था मेरा मन अर्से से, अब इसे बहने दो
कल्पना कि उड़ान ही सही,पर दुनिया तो देख लूँगापिंजरे में बंद ही सही,पर आसमान तो छू लूँगा
एक दिन खोल सकूँगा अपने पर,मापने के लिए आसमां कोएक दिन निकलूंगा इस पिंजरे से,दुनिया का मैंदान मापने को
बनकर दिखाऊंगा इस जहां में,सच कर दूंगा हर सपने कोबस मुझे….मुझे उड़ने दो…
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