Introduction poetry.

देना होगा फिर परिचय अपना,सुनवानी होगी अपनी ललकार.सन्न रह जाएगा आलम सारा,जब गूँज उठेगी अपनी हुंकार.
अंग्रेजों को धूल चटा दी हमने,ये तो अपने ही भाई है.मानवता से सिखा दो इनको,क्योंकि सच्चाई के हम राही है.
दिल गूँज उठा था मेरा उस पल,जब देख पहल ये क्रान्ति थी.दिल में उमड़ा जज्बा तब था.तब अनजानी सी एक शान्ति थी.
एकता का जज्बा देखा मैंने,और बस देखते ही मैं रह गया.जब गूंज उठे भारत के बोल,तब बस आँहें भरता मैं रह गया.
समय आ गया बदलो पल को,अब एक नया देश बनाना है.नहीं छीन सका कोई ये देश हमसे,ये फिर से एहसास दिलाना है.
अपने राग में दौड़ रहा अब,बदल भारत को ही जाना है.नहीं उठे है शस्त्र अभी,और न ही अश्त्र उठाना है.

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