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फयाद आसुओं में निकली जब,और हंसी के साथ नकार दी.अनायत भी दुश्वार हुई जब,और हकीकत भी नागवार थी.
हो जाता इश्क उस पल,जो हम बयां किससे करते.दिल ढूंढ़ लेता अपनी धड़कन,तो इनकार हम उसे कैसे करते.
फरयाद करनी पड़ी खुदा से उस पल,जब छोड़कर वो हमें जाने लगे थे.ए-खुदा दिखा दे तू अपना तिलिस्म,हर पल सुने दिल को रुलाने लगे थे.
कायनात से आगे भी अपनी मोहब्बत होगी,सरहदों से परे भी अपनी मोहब्बत होगी.रह जाएगा खुदा भी पूछता जब,दिलों के समंदर से परे भी अपनी मोहब्बत होगी.
इनकार न कर सकूँगा मैं उसे,जिस पल वो मेरे सामने आएगा.जुदा न कर पाऊंगा मैं उसे,जिल पल वो मुझमे सिमट जाएगा.
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