A Hindi Poem.
क्योंकि तेरी फरयाद में चाहत थी,क्योंकि तेरे नसीब में एक राहत थी.जज्बा भी था तेरे वजूद में,क्योंकि तेरे साए में मोहब्बत की आहट थी.
सच्ची थी तेरी मोहब्बत और,सच्चा तेरा ईमान भी था.सच्चाई थी तेरे ख्याल में,और सच्चा तेरा अरमान भी था.
तेरी फरयाद पहले से मंजूर थी खुदा को,तेरी आरजू पहले से रजा थी खुदा को.इम्तिहान तो लिए ही होंगे अल्लाह ने तुझसे,पर तेरी कामयाबी का पता था खुदा को..
कबसे तूने इस पल का इंतज़ार किया था,अनकहे लब्जों से भी जब तूने इकरार किया था.खुशियाँ तेरी हो चली थी दोगुनी उस पल,जब बंद आखों से भी तूने उसका दीदार किया था.
खुदा कि रहमत तुझ पर इस कदर मेहरबान हो,छूट जाए सारे गम, और न कभी शाम हो.रह जाए तेरी पलकों में छुपा तेरा महबूब,औकात की अनायत, और मोहब्बत का भी नाम हो.
Currently there are no comments related to "सुन ली तेरी खुदा ने". You have a special honor to be the first commenter. Thanks!
Welcome to Authspot, the spot for creative writing.
Read some stories and poems, and be sure to subscribe to our feed!