आज फिर जली एक सिगरेट …
Cigarette
आज फिर जली
एक सिगरेट
धुआं आँखों
में लगा
पीने वाले ने
खींच कर प़ी
और हंसकर
बातों में लगा
उसके भीतर -बाहर
जो हुआ नुकसान
उस नादान को
न दिखा
उसके छोटों ने भी
सीखा उससे
होता है क्या
छोटा नशा
बड़ा नशा भी
वो आजमाने लगा
रोका बड़े भाई ने
वो तो भी न रुका
आप जो न पीते भैया
तो मैं भी न पीता होता
आपकी अच्छाई मैंने सीखीं थी
गर ये बुराई न मैं सीखा होता
छोटी ही उम्र में भैया
शायद सिगरेट की बजह से में बीमार पड़ने लगा हूँ
नशे के लिए मुझे चक्कर आ रहे हैं
पता नहीं कैसे मैं पैरों पर खड़ा हूँ
बड़े ने छोटे की
दुर्दशा को देखा
और सिगरेट का पैकिट
जेब से निकाल कर फेंका
तू भी एक दिन पीने लगेगा
बेटा इसलिए मैं नहीं पीता था
अपनी थकान को भगाने का
मेरे पास यही तरीका था
छोटा बोला भैया
मैंने भी अपनी थकान भगाई है
आपने जब प़ी तो अच्छाई थी
और जब मैंने प़ी तो बुराई है
बड़े का छोटा नशा
छोटे का बड़ा नशा बन गया
और जो नन्हा दुलारा
ज्यादा जीना चाहिए था मर गया
काश वो सिगरेट न जली होती
तो दो भाईओं को एक बुरी आदत न मिली होती
बड़े माँ -बाप की आंखें न गीली होती
तीली ज़रूर जलती पर घर के मंदिर की अगरबत्ती के लिए वो तीली होती
कम से कम एक सिगरेट के लिए तो न जलती
कितना अच्छा होता गर बड़ा न करता गलती
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